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bhagavat 10.59.25: देवी भूमि ने कहा: हे देवों के देव, हे शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले, आपको नमस्कार है। हे परमात्मा, आप अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरी करने के लिए विभिन्न रूप धारण करते हैं। आपको नमस्कार है।   |   bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.59.25 
भूमिरुवाच
नमस्ते देवदेवेश शङ्खचक्रगदाधर ।
भक्तेच्छोपात्तरूपाय परमात्मन् नमोऽस्तु ते ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
देवी भूमि ने कहा: हे देवों के देव, हे शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले, आपको नमस्कार है। हे परमात्मा, आप अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरी करने के लिए विभिन्न रूप धारण करते हैं। आपको नमस्कार है।
 
Bhumi Devi said: O Devdev, O bearer of conch, discus and mace, salutations to you. O Supreme Being, you take various forms to fulfill the desires of your devotees. Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)