Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.59.24: हे राजन, दंडवत प्रणाम करके और फिर हाथ जोड़कर खड़ी हो गई वे देवी भक्ति-भाव से परिपूर्ण होकर ब्रह्मांड के उस स्वामी की स्तुति करने लगीं जिनकी पूजा श्रेष्ठतम देवतागण भी करते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.59.24 
अस्तौषीदथ विश्वेशं देवी देववरार्चितम् ।
प्राञ्जलि: प्रणता राजन् भक्तिप्रवणया धिया ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, दंडवत प्रणाम करके और फिर हाथ जोड़कर खड़ी हो गई वे देवी भक्ति-भाव से परिपूर्ण होकर ब्रह्मांड के उस स्वामी की स्तुति करने लगीं जिनकी पूजा श्रेष्ठतम देवतागण भी करते हैं।
 
O King, after paying her obeisance to him and standing before him with folded hands, the Goddess, filled with devotion, began to praise the Lord of the universe, who is worshipped by the greatest gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)