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bhagavat 10.59.14: भगवान ने पीठ आदि शत्रुओं के मस्तक, जाँघें, बाहें, पैर और कवच काट दिए और सबको यमराज के लोक भेज दिया। पृथ्वी पुत्र नरकासुर ने जब अपने सेनापतियों का ऐसा हाल देखा तो वह क्रोधित हो गया। इसलिए वह क्षीर सागर से पैदा हुए हाथियों के साथ, जो उन्मत्तता के कारण अपने मस्तक से मद बहा रहे थे, अपने किले से बाहर आया।   |   bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.59.14 
तान् पीठमुख्याननयद् यमक्षयं
निकृत्तशीर्षोरुभुजाङ्‍‍घ्रिवर्मण: ।
स्वानीकपानच्युतचक्रसायकै-
स्तथा निरस्तान् नरको धरासुत: ।
निरीक्ष्य दुर्मर्षण आस्रवन्मदै-
र्गजै: पयोधिप्रभवैर्निराक्रमात् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने पीठ आदि शत्रुओं के मस्तक, जाँघें, बाहें, पैर और कवच काट दिए और सबको यमराज के लोक भेज दिया। पृथ्वी पुत्र नरकासुर ने जब अपने सेनापतियों का ऐसा हाल देखा तो वह क्रोधित हो गया। इसलिए वह क्षीर सागर से पैदा हुए हाथियों के साथ, जो उन्मत्तता के कारण अपने मस्तक से मद बहा रहे थे, अपने किले से बाहर आया।
 
The Lord cut off the heads, thighs, arms, legs and armour of his opponents and sent them all to the world of Yamaraja. When Narakasura, the son of the earth, saw the condition of his army commanders, he could not control his anger. So he came out of his fort with the elephants born from the Ksheer Sagar, who were oozing wine from their foreheads due to madness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)