Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.58.54: गाण्डीव धनुष धारण करने वाले अर्जुन अपने मित्र कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे, इसलिए उन्होंने उन सभी प्रतिद्वंद्वियों को दूर भगा दिया जो भगवान पर बाणों की बरसात कर रहे थे। उन्होंने यह सब कुछ वैसे ही किया जैसे कोई शेर छोटे जानवरों को भगा देता है। | bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गाण्डीव धनुष धारण करने वाले अर्जुन अपने मित्र कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे, इसलिए उन्होंने उन सभी प्रतिद्वंद्वियों को दूर भगा दिया जो भगवान पर बाणों की बरसात कर रहे थे। उन्होंने यह सब कुछ वैसे ही किया जैसे कोई शेर छोटे जानवरों को भगा देता है।
Arjuna, the wielder of the Gāṇḍīva bow, was always anxious to please his friend Kṛṣṇa, and so he drove away all those rivals who were showering arrows upon the Lord. He did this in the same manner as a lion drives away small animals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥