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bhagavat 10.58.44: यदि तुम इन्हें वश में कर सकते हो, हे यदुकुल के वंशज, निःसंदेह, हे श्री के स्वामी, तब तुम ही मेरी पुत्री के उपयुक्त वर होगे।   |   bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  10.58.44 
यदिमे निगृहीता: स्युस्त्वयैव यदुनन्दन ।
वरो भवानभिमतो दुहितुर्मे श्रिय:पते ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम इन्हें वश में कर सकते हो, हे यदुकुल के वंशज, निःसंदेह, हे श्री के स्वामी, तब तुम ही मेरी पुत्री के उपयुक्त वर होगे।
 
O descendant of Yadu, if you can subdue them then certainly, O Lord of all ranks, you will be a suitable husband for my daughter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)