Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.58.41: राजा ने कहा: हे प्रभु, आप जैसे दिव्य गुणों से सुशोभित और कौन है जो मेरी पुत्री के योग्य हो सकता है? आपके शरीर पर साक्षात् लक्ष्मी सदैव वास करती हैं और किसी भी कारणवश वे आपको कभी नहीं छोड़तीं। | bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा ने कहा: हे प्रभु, आप जैसे दिव्य गुणों से सुशोभित और कौन है जो मेरी पुत्री के योग्य हो सकता है? आपके शरीर पर साक्षात् लक्ष्मी सदैव वास करती हैं और किसी भी कारणवश वे आपको कभी नहीं छोड़तीं।
The king said: O Lord, who can be a better groom for my daughter than you? You are the abode of all divine qualities. Goddess Lakshmi resides in your body and she never leaves you for any reason.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥