Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.58.36: जब राजा की पुत्री ने देखा कि सबसे योग्य और सुंदर दुल्हा आ पहुँचा है, तो उसने तुरंत भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति पाने की कामना की। उसने प्रार्थना की, “वे मेरे पति बनें। अगर मैंने शुभ व्रतों का पालन किया है, तो पवित्र अग्नि मेरी आशाओं की सिद्धि कराए।” | bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वरं विलोक्याभिमतं समागतं
नरेन्द्रकन्या चकमे रमापतिम् ।
भूयादयं मे पतिराशिषोऽनल:
करोतु सत्या यदि मे धृतो व्रत: ॥ ३६ ॥
अनुवाद
जब राजा की पुत्री ने देखा कि सबसे योग्य और सुंदर दुल्हा आ पहुँचा है, तो उसने तुरंत भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति पाने की कामना की। उसने प्रार्थना की, “वे मेरे पति बनें। अगर मैंने शुभ व्रतों का पालन किया है, तो पवित्र अग्नि मेरी आशाओं की सिद्धि कराए।”
When the king's daughter saw that the most suitable bridegroom had arrived, she immediately desired to have Sri Krishna, the husband of Rama. She prayed, "Let him be my husband. If I have performed vows, may the holy fire fulfill my hopes."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥