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bhagavat 10.58.31: हे राजन्, अपनी बुआ राजाधिदेवी की कन्या मित्रविंदा को प्रतिद्वंद्वी राजाओं के सामने से प्रभु श्रीकृष्ण बलपूर्वक ले गए।   |   bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.58.31 
राजाधिदेव्यास्तनयां मित्रविन्दां पितृष्वसु: ।
प्रसह्य हृतवान् कृष्णो राजन् राज्ञां प्रपश्यताम् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, अपनी बुआ राजाधिदेवी की कन्या मित्रविंदा को प्रतिद्वंद्वी राजाओं के सामने से प्रभु श्रीकृष्ण बलपूर्वक ले गए।
 
O king, Lord Krishna forcefully took away Mitravinda, the daughter of his aunt Rajadhidevi, in front of the rival kings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)