श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.58.1 
श्रीशुक उवाच
एकदा पाण्डवान् द्रष्टुं प्रतीतान् पुरुषोत्तम: ।
इन्द्रप्रस्थं गत: श्रीमान् युयुधानादिभिर्वृत: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: एक बार परम ऐश्वर्यवान भगवान् श्रीकृष्ण पाण्डवों को देखने के लिए इन्द्रप्रस्थ गये जो पुन: जनता के बीच प्रकट हो चुके थे। भगवान् के साथ युयुधान और अन्य संगी भी थे।
 
Sukadeva Goswami said: Once the most glorious Lord went to Indraprastha to see the Pandavas who had again appeared among the people. The Lord was accompanied by Yuyudhan and other companions.
तात्पर्य
कृष्ण और बलराम के अलावा बाकी सभी लोग ये सोचते थे की पांडव दुर्योधन द्वारा लाख के घर मे आग लगाने की वजह से मर चुके हैं। अब पांडव फिर से लोगों के बीच आ चुके थे और कृष्ण उनसे मिलने आये थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)