श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.57.5 
एवं भिन्नमतिस्ताभ्यां सत्राजितमसत्तम: ।
शयानमवधील्ल‍ोभात् स पाप: क्षीणजीवित: ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, उनकी सलाह से उसका मन बदल गया और दुष्ट शतधन्वा ने लालच में आकर सोते हुए सत्राजित की हत्या कर दी। इस तरह पापी शतधन्वा ने अपने जीवनकाल को कम कर लिया।
 
In this way his mind was influenced by their advice and the evil Shatdhanva, out of greed, killed Satrajit while he was sleeping. In this way the sinful Shatdhanva shortened his lifespan.
तात्पर्य
श्रीला विश्वनाथ चक्रवर्ती के मतानुसार, असत्तमः शब्द दर्शाता है कि शतधन्वा मूलतः दुष्ट स्वभाव का और सात्राजित का पक्का वैरी था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)