Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.57.42: भगवान विष्णु के पराक्रम का वर्णन करने वाली यह कथा पापों को दूर करके सभी प्रकार के मंगल प्रदान करती है। जो कोई भी इसे पढ़ता, सुनता या याद रखता है, वह अपने पापों और अपयश से मुक्त होकर शांति प्राप्त करता है। | bhagavat अध्याय 10.57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्त्वेतद् भगवत ईश्वरस्य विष्णो-
र्वीर्याढ्यं वृजिनहरं सुमङ्गलं च ।
आख्यानं पठति शृणोत्यनुस्मरेद् वा
दुष्कीर्तिं दुरितमपोह्य याति शान्तिम् ॥ ४२ ॥
अनुवाद
भगवान विष्णु के पराक्रम का वर्णन करने वाली यह कथा पापों को दूर करके सभी प्रकार के मंगल प्रदान करती है। जो कोई भी इसे पढ़ता, सुनता या याद रखता है, वह अपने पापों और अपयश से मुक्त होकर शांति प्राप्त करता है।
This story, which is full of descriptions of the might of Lord Vishnu, removes sinful results and bestows all auspiciousness. Whoever reads, listens or remembers it will be able to drive away his infamy and sins and attain peace.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत सत्तावन अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥