"फिर भी, हे विश्वासपात्र अक्रूर, यह मणि तुम्हारे संरक्षण में रहना चाहिए क्योंकि कोई अन्य इसे सुरक्षित नहीं रख सकता। लेकिन कृपया एक बार इसे दिखाओ, क्योंकि मेरे ज्येष्ठ भ्राता उस पर पूरी तरह से विश्वास नहीं करते जो मैंने उन्हें इसके बारे में बताया है। इस तरह, हे भाग्यशाली, तुम मेरे परिजनों को शांत कर सकोगे। [हर कोई जानता है कि मणि तुम्हारे पास है क्योंकि] तुम लगातार सोने की वेदियों पर यज्ञ कर रहे हो।"
“Even so, O trustworthy Akrura, this gem must remain in your custody, for no one else can keep it safe. Just show me the gem once, for my elders do not fully believe what I have told them about it. In this way, O most fortunate one, you will be able to pacify my relatives. [Everyone knows that the gem is in your possession because] at this time you are constantly performing sacrifices on altars made of gold.”
तात्पर्य
यद्यपि तकनीकी रूप से सत्यभामा के पुत्रों का उस जवाहरात पर अधिकार था, परंतु भगवान कृष्ण ने उस जवाहरात को अक्रूर की देखरेख में रखने का फैसला किया, जो लगातार धार्मिक यज्ञ करने के लिए उस जवाहरात के धन का उपयोग कर रहे थे। निस्संदेह, सोने की वेदियों पर इस तरह के अनुष्ठान करने की अक्रूर की क्षमता जवाहरात की शक्ति का संकेत थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥