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bhagavat 10.57.33: अक्रूर, जो इंद्र की तरह ही शक्तिशाली है, जहाँ भी ठहरता है, वहाँ इंद्र पर्याप्त वर्षा करते हैं। निस्संदेह, वह स्थान सभी कष्टों और असामयिक मृत्यु से रहित हो जाता है।   |   bhagavat अध्याय 10.57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.57.33 
तत्सुतस्तत्प्रभावोऽसावक्रूरो यत्र यत्र ह ।
देवोऽभिवर्षते तत्र नोपतापा न मारीका: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
अक्रूर, जो इंद्र की तरह ही शक्तिशाली है, जहाँ भी ठहरता है, वहाँ इंद्र पर्याप्त वर्षा करते हैं। निस्संदेह, वह स्थान सभी कष्टों और असामयिक मृत्यु से रहित हो जाता है।
 
Wherever his son Akrura, who is as powerful as Indra, stays, he will send abundant rain. Undoubtedly, that place will be free from all sufferings and untimely deaths.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)