श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.57.30 
अक्रूरे प्रोषितेऽरिष्टान्यासन् वै द्वारकौकसाम् ।
शारीरा मानसास्तापा मुहुर्दैविकभौतिका: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
अक्रूर की अनुपस्थिति में द्वारका में कई अपशकुन देखे जाने लगे, और इसके अलावा वहाँ के लोग शारीरिक और मानसिक कष्टों से तो परेशान थे ही साथ ही देवताओं तथा प्रकृति के प्रकोपों से भी त्रस्त रहने लगे।
 
In the absence of Akrur, many inauspicious events began to occur in Dwarka and the residents there, in addition to suffering from physical and mental troubles, also started suffering from divine and physical calamities.
तात्पर्य
यहाँ शब्द दैविक का अर्थ अलौकिक प्राणियों के कारण होने वाले विघ्नों से है। ये विघ्न अक्सर भूकंप, ज्वार की लहर या अत्यधिक खराब मौसम जैसी प्राकृतिक आपदाओं के रूप में प्रकट होते हैं। आजकल भौतिकवादी लोग इन विघ्नों को सांसारिक कारणों के लिए जिम्मेदार मानते हैं, यह एहसास नहीं करते कि ये श्रेष्ठ प्राणियों के हाथों दंड का रूप हैं। शब्द भौतिकः का अर्थ पृथ्वी के प्राणियों, जैसे मानव, पशु और कीटों द्वारा उत्पन्न परेशानी से है।

श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, अक्रूर ने स्यमंतक मणि ली और बनारस शहर में रहने चले गए, जहाँ उन्हें दानपति, "दान के स्वामी" के रूप में जाना जाने लगा। वहां उन्होंने योग्य पुजारियों की विस्तृत सभाओं के साथ सोने की वेदियों पर अग्नि यज्ञ किए।

द्वारका के कुछ निवासियों ने महसूस किया कि असामान्य आपदाएँ अक्रूर की अनुपस्थिति के कारण थीं, जिसे (जैसा कि अगले श्लोक में वर्णित है) भूल गए कि द्वारका में सर्वोच्च भगवान की व्यक्तिगत उपस्थिति उस संभावना को रोक देती है। क्योंकि जब भगवान पृथ्वी पर आते हैं तो उनके मनोरंजन मानव प्राणियों की तरह होते हैं, "परिचय अवमानना ​​को जन्म देता है" का सिद्धांत चलन में आता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कई संत व्यक्तियों और भगवान के अवतारों के जीवन के दौरान हमेशा ऐसे लोगों का एक वर्ग मौजूद होता है जो उनके बीच महान आत्माओं की स्थिति की सराहना करने में या केवल कभी-कभार सराहना करने में विफल होते हैं। दूसरी ओर, भाग्यशाली और प्रबुद्ध आत्माएँ जो भगवान और उनके सहयोगियों की सही स्थिति को पहचानती हैं, वे अत्यधिक धन्य हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)