Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.57.29: जब अक्रूर तथा कृतवर्मा, जिन्होंने पहले शतधन्वा को अपराध करने के लिए उकसाया था, सुना कि उसका वध हो गया है, तो दोनों डर के मारे द्वारिका से भाग गए और दूसरी जगह अपना आश्रय लिया। | bhagavat अध्याय 10.57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अक्रूर: कृतवर्मा च श्रुत्वा शतधनोर्वधम् ।
व्यूषतुर्भयवित्रस्तौ द्वारकाया: प्रयोजकौ ॥ २९ ॥
अनुवाद
जब अक्रूर तथा कृतवर्मा, जिन्होंने पहले शतधन्वा को अपराध करने के लिए उकसाया था, सुना कि उसका वध हो गया है, तो दोनों डर के मारे द्वारिका से भाग गए और दूसरी जगह अपना आश्रय लिया।
When Akrura and Kritavarma, who had initially instigated Shatadhanva to commit the crime, heard that he had been killed, they fled from Dwaraka in fear and took refuge elsewhere.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥