श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 57: सत्राजित की हत्या और मणि की वापसी  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.57.27 
केशवो द्वारकामेत्य निधनं शतधन्वन: ।
अप्राप्तिं च मणे: प्राह प्रियाया: प्रियकृद् विभु: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान केशव द्वारका पहुँचे और शतधन्वा की मृत्यु और स्यमन्तक मणि को खोजने में अपनी विफलता का वर्णन किया। उन्होंने इस तरह से बात की जिससे उनकी प्रियतमा सत्यभामा प्रसन्न हो सकें।
 
Lord Keshava came to Dwaraka and narrated the death of Shatadhanva and his failure to find the Syamantaka Mani. He spoke in such a way that his beloved Satyabhama could be pleased.
तात्पर्य
स्वाभाविक ही रानी सत्यभामा यह सुनकर खुश हुईं कि उनके पिता के हत्यारे को न्याय के कटघरे में लाया गया था। लेकिन उनके पिता का स्यमंतक मणि अभी भी वापस पाया जाना था, और इसलिए वे प्रभु कृष्ण के इसे पुनः प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प को सुनकर भी प्रसन्न हुईं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)