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bhagavat 10.56.40-42: अपने घोर अपराध पर विचार करते हुए और भगवान के शक्तिशाली भक्तों से संघर्ष की संभावना से चिंतित, राजा सत्राजित ने सोचा, “मैं किस तरह अपने पापों से छुटकारा पा सकता हूं और भगवान अच्युत मुझ पर प्रसन्न हो सकते हैं? मैं अपने सौभाग्य को फिर से कैसे पा सकता हूँ? दूरदर्शिता की कमी, कंजूसी, मूर्खता और लालच के कारण लोगों के शाप से कैसे बचूं? मैं अपनी बेटी, जो सभी महिलाओं में रत्न है, स्यमंतक मणि के साथ भगवान को दे दूँगा। निस्संदेह, उन्हें शांत करने का यही एकमात्र उचित तरीका है।”   |   bhagavat अध्याय 10.56: स्यमन्तक मणि   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 56: स्यमन्तक मणि  »  श्लोक 40-42
 
 
श्लोक  10.56.40-42 
सोऽनुध्यायंस्तदेवाघं बलवद्विग्रहाकुल: ।
कथं मृजाम्यात्मरज: प्रसीदेद् वाच्युत: कथम् ॥ ४० ॥
किं कृत्वा साधु मह्यं स्यान्न शपेद् वा जनो यथा ।
अदीर्घदर्शनं क्षुद्रं मूढं द्रविणलोलुपम् ॥ ४१ ॥
दास्ये दुहितरं तस्मै स्‍त्रीरत्नं रत्नमेव च ।
उपायोऽयं समीचीनस्तस्य शान्तिर्न चान्यथा ॥ ४२ ॥
 
 
अनुवाद
अपने घोर अपराध पर विचार करते हुए और भगवान के शक्तिशाली भक्तों से संघर्ष की संभावना से चिंतित, राजा सत्राजित ने सोचा, “मैं किस तरह अपने पापों से छुटकारा पा सकता हूं और भगवान अच्युत मुझ पर प्रसन्न हो सकते हैं? मैं अपने सौभाग्य को फिर से कैसे पा सकता हूँ? दूरदर्शिता की कमी, कंजूसी, मूर्खता और लालच के कारण लोगों के शाप से कैसे बचूं? मैं अपनी बेटी, जो सभी महिलाओं में रत्न है, स्यमंतक मणि के साथ भगवान को दे दूँगा। निस्संदेह, उन्हें शांत करने का यही एकमात्र उचित तरीका है।”
 
Reflecting upon his grave offense and anxious about the possibility of a conflict with the Lord's powerful devotees, King Satrājit thought, “How can I wash away my sin myself and please Lord Acyuta? What can I do to regain my good fortune? How can I avoid being cursed by the people for being lacking foresight, miserly, foolish and greedy? I will offer my daughter, who is the jewel of all women, to the Lord along with the Syamantaka jewel. This is undoubtedly the only proper way to pacify Him.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)