Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.56.4: सत्राजित मणि को गले में पहनकर द्वारका नगरी में दाखिल हुआ। हे राजन, वह मानो सूर्य की तरह चमक रहा था और मणि के प्रभाव से कोई उसे पहचान नहीं पा रहा था। | bhagavat अध्याय 10.56: स्यमन्तक मणि । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तं बिभ्रन् मणिं कण्ठे भ्राजमानो यथा रवि: ।
प्रविष्टो द्वारकां राजन् तेजसा नोपलक्षित: ॥ ४ ॥
अनुवाद
सत्राजित मणि को गले में पहनकर द्वारका नगरी में दाखिल हुआ। हे राजन, वह मानो सूर्य की तरह चमक रहा था और मणि के प्रभाव से कोई उसे पहचान नहीं पा रहा था।
Satrajit entered Dwaraka wearing that gem on his neck. O King, he was shining like the Sun and could not be recognized due to the brilliance of the gem.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥