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bhagavat 10.56.38: भगवान कृष्ण ने राजा उग्रसेन की उपस्थिति में सत्राजित को राजसभा में बुलाया। वहाँ, कृष्ण ने मणि पाये जाने की घोषणा की और औपचारिक रीति से उसे सत्राजित को लौटा दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.56: स्यमन्तक मणि   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 56: स्यमन्तक मणि  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.56.38 
सत्राजितं समाहूय सभायां राजसन्निधौ ।
प्राप्तिं चाख्याय भगवान् मणिं तस्मै न्यवेदयत् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण ने राजा उग्रसेन की उपस्थिति में सत्राजित को राजसभा में बुलाया। वहाँ, कृष्ण ने मणि पाये जाने की घोषणा की और औपचारिक रीति से उसे सत्राजित को लौटा दिया।
 
Lord Krishna called Satrajit to the royal court. There, in the presence of King Ugrasen, Krishna announced the discovery of the gem and then formally presented it to Satrajit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)