श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 56: स्यमन्तक मणि  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.56.21 
तमपूर्वं नरं द‍ृष्ट्वा धात्री चुक्रोश भीतवत् ।
तच्छ्रुत्वाभ्यद्रवत् क्रुद्धो जाम्बवान् बलिनां वर: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
उस असाधारण व्यक्ति को अपने सामने देखकर बालक की धाई डर कर चिल्ला पड़ी। उसकी चीख़ सुनकर बहादुरों में सबसे बहादुर जाम्बवान गुस्से में भगवान की तरफ़ दौड़ा।
 
Seeing that extraordinary person standing before her, the child's nurse screamed in fear. Hearing her scream, Jambavan, the strongest of the strong, became angry and ran towards the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)