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bhagavat 10.56.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: कृष्ण का अपमान करने के बाद, सत्राजित ने अपनी बेटी और स्यमन्तक मणि भेंट करके हर संभव प्रयास से प्रायश्चित करने की कोशिश की।   |   bhagavat अध्याय 10.56: स्यमन्तक मणि   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 56: स्यमन्तक मणि  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.56.1 
श्रीशुक उवाच
सत्राजित: स्वतनयां कृष्णाय कृतकिल्बिष: ।
स्यमन्तकेन मणिना स्वयमुद्यम्य दत्तवान् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: कृष्ण का अपमान करने के बाद, सत्राजित ने अपनी बेटी और स्यमन्तक मणि भेंट करके हर संभव प्रयास से प्रायश्चित करने की कोशिश की।
 
Sukadeva Goswami said: After insulting Krishna, Satrājit tried his best to atone for his sins by offering him his daughter and the Syamantaka jewel.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)