श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  10.55.7-8 
सा च कामस्य वै पत्नी रतिर्नाम यशस्विनी ।
पत्युर्निर्दग्धदेहस्य देहोत्पत्तिं प्रतीक्षती ॥ ७ ॥
निरूपिता शम्बरेण सा सूदौदनसाधने ।
कामदेवं शिशुं बुद्ध्वा चक्रे स्‍नेहं तदार्भके ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
दरअसल, मायावती कामदेव की विख्यात पत्नी रति थी। वह तब तक अपने पति की प्रतीक्षा में थी जब तक कि वह नया शरीर प्राप्त नहीं कर लेता है क्योंकि उसका पिछला शरीर भस्म हो गया था। मायावती को शम्बर द्वारा सब्जियाँ और चावल तैयार करने का कार्य सौंपा गया था। मायावती समझ गई थी कि यह शिशु वास्तव में कामदेव है और इसीलिए वह उससे प्रेम करने लगी थी।
 
In fact Mayavati was Rati, the famous wife of Kamadeva. She was waiting for her husband to give her a new body as his previous body had been burnt to ashes. Mayavati was assigned the task of cooking vegetables and rice by Shambar. Mayavati understood that this child was actually Kamadeva and so she fell in love with him.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती इस कथा की व्याख्या इस प्रकार करते हैं: जब कामदेव के शरीर को भस्म कर दिया गया, तो रति ने कामदेव के लिए दूसरा शरीर प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की आराधना की। शम्बर, जो एक वरदान के लिए शिव के पास आया था, पहले भगवान द्वारा पहचाना गया, जिन्होंने उससे कहा, "अब तुम्हें अपने वरदान के लिए पूछना चाहिए।" शम्बर, रति को देखकर वासना से अभिभूत हो गया, उसने उत्तर दिया कि वह उसे अपने वरदान के रूप में चाहता था, और शिव ने उसकी बात मान ली। भगवान शिव ने तब रोती हुई रति को यह कहते हुए सांत्वना दी, "उसके साथ जाओ, और उसके घर में ही तुम वह प्राप्त करोगी जो तुम चाहती हो।" इसके बाद, रति ने अपनी भ्रामक शक्ति से शम्बर को चकमा दिया और, मायावती नाम धारण करते हुए, उसके घर में अछूती रही।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)