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bhagavat 10.55.4: एक विशाल मछली ने प्रद्युम्न को निगल लिया, और यह मछली, अन्य मछलियों के साथ, मछुआरों द्वारा एक विशाल जाल में फंसकर पकड़ी गई थी।   |   bhagavat अध्याय 10.55: प्रद्युम्न-कथा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.55.4 
तं निर्जगार बलवान् मीन: सोऽप्यपरै: सह ।
वृतो जालेन महता गृहीतो मत्स्यजीविभि: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
एक विशाल मछली ने प्रद्युम्न को निगल लिया, और यह मछली, अन्य मछलियों के साथ, मछुआरों द्वारा एक विशाल जाल में फंसकर पकड़ी गई थी।
 
Pradyumna was swallowed by a powerful fish and this fish along with other fishes was caught in a big net by the fishermen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)