श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.55.30 
अथ तत्रासितापाङ्गी वैदर्भी वल्गुभाषिणी ।
अस्मरत् स्वसुतं नष्टं स्‍नेहस्‍नुतपयोधरा ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
प्रद्युम्न को देखते ही मधुर वाणी और बड़ी-बड़ी आँखों वाली रुक्मिणी ने अपने गुमशुदा पुत्र को याद किया, तो स्नेहवश उनके स्तन भीग गए।
 
Seeing Pradyumna, sweet-voiced and dark-eyed Rukmini remembered her lost son, and her breasts became wet with affection.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)