श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.55.3 
तं शम्बर: कामरूपी हृत्वा तोकमनिर्दशम् ।
स विदित्वात्मन: शत्रुं प्रास्योदन्वत्यगाद् गृहम् ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
शम्बर नाम का एक असुर था जो अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था। उसने प्रद्युम्न को अपना शत्रु समझकर उसे केवल दस दिन का होते हुए ही उठा लिया। शम्बर ने प्रद्युम्न को समुद्र में फेंक दिया और फिर अपने घर लौट आया।
 
Shambar Asura, who could assume any form at will, kidnapped the child, who was not even ten days old. Considering Pradyumna as his enemy, Shambar threw him into the sea and then returned to his home.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने बताया जैसे विष्णु पुराण में है, प्रद्युम्न का जन्म के छठवें दिन हरण हुआ था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)