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bhagavat 10.55.29: धीरे-धीरे, उनके और कृष्ण की वेशभूषा में कुछ अंतरों से स्त्रियों को एहसास हुआ कि ये भगवान कृष्ण नहीं हैं। वो अत्यंत आनंदित और आश्चर्यचकित होकर प्रद्युम्न और उनकी प्रेयसी (जो नारियों में सर्वश्रेष्ठ थीं) के पास पहुँचीं।   |   bhagavat अध्याय 10.55: प्रद्युम्न-कथा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.55.29 
अवधार्य शनैरीषद्वैलक्षण्येन योषित: ।
उपजग्मु: प्रमुदिता: सस्‍त्रीरत्नं सुविस्मिता: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
धीरे-धीरे, उनके और कृष्ण की वेशभूषा में कुछ अंतरों से स्त्रियों को एहसास हुआ कि ये भगवान कृष्ण नहीं हैं। वो अत्यंत आनंदित और आश्चर्यचकित होकर प्रद्युम्न और उनकी प्रेयसी (जो नारियों में सर्वश्रेष्ठ थीं) के पास पहुँचीं।
 
Gradually, due to some differences in his and Krishna's attire, the women realized that he was not Lord Krishna. They were very happy and surprised and came to Pradyumna and his beloved woman Ratna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)