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bhagavat 10.55.27-28: जब महल की स्त्रियों ने उनकी वर्षा के बादल जैसी साँवली सूरत देखी, फिर उनके पीले रेशमी कपड़ों, उनकी लम्बी भुजाओं, मनोहक हँसी वाले आकर्षक कमल से खिले चेहरे, उनके भव्य आभूषण और उनके घुँघराले काले बालों पर नजर पड़ी तो वे सोचने लगीं कि वे भगवान कृष्ण ही हैं। यह सोचकर सारी स्त्रियाँ लजा कर इधर-उधर छिप गईं।   |   bhagavat अध्याय 10.55: प्रद्युम्न-कथा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  10.55.27-28 
तं द‍ृष्ट्वा जलदश्यामं पीतकौशेयवाससम् ।
प्रलम्बबाहुं ताम्राक्षं सुस्मितं रुचिराननम् ॥ २७ ॥
स्वलङ्कृतमुखाम्भोजं नीलवक्रालकालिभि: ।
कृष्णं मत्वा स्‍त्रियो ह्रीता निलिल्युस्तत्र तत्र ह ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
जब महल की स्त्रियों ने उनकी वर्षा के बादल जैसी साँवली सूरत देखी, फिर उनके पीले रेशमी कपड़ों, उनकी लम्बी भुजाओं, मनोहक हँसी वाले आकर्षक कमल से खिले चेहरे, उनके भव्य आभूषण और उनके घुँघराले काले बालों पर नजर पड़ी तो वे सोचने लगीं कि वे भगवान कृष्ण ही हैं। यह सोचकर सारी स्त्रियाँ लजा कर इधर-उधर छिप गईं।
 
When the women of the palace saw His dark complexion like a rain cloud, His yellow silken garments, His long arms, His attractive lotus face with a charming smile, His beautiful ornaments and His curly black hair, they thought He was Krishna. So all the women were shy and hid themselves here and there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)