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bhagavat 10.55.17: प्रद्युम्न ने शम्बर से संपर्क करके उसे युद्ध के मैदान में आने के लिए चुनौती दी और उसे असहनीय रूप से अपमानित किया ताकि उनके बीच संघर्ष बढ़ सके।   |   bhagavat अध्याय 10.55: प्रद्युम्न-कथा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.55.17 
स च शम्बरमभ्येत्य संयुगाय समाह्वयत् ।
अविषह्यैस्तमाक्षेपै: क्षिपन् सञ्जनयन् कलिम् ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
प्रद्युम्न ने शम्बर से संपर्क करके उसे युद्ध के मैदान में आने के लिए चुनौती दी और उसे असहनीय रूप से अपमानित किया ताकि उनके बीच संघर्ष बढ़ सके।
 
Pradyumna went to Shambar and challenged him to a fight by using unbearable insulting words to escalate the dispute.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)