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bhagavat 10.55.15: पुत्र के खो जाने से बेचारी तुम्हारी माँ एक कुररी पक्षी की तरह विलाप कर रही है। वह अपने पुत्र के प्रेम में उसी तरह डूबी हुई है, जैसे कोई गाय अपने बछड़े से बिछड़ जाने के बाद रहती है।   |   bhagavat अध्याय 10.55: प्रद्युम्न-कथा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 55: प्रद्युम्न-कथा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.55.15 
परीशोचति ते माता कुररीव गतप्रजा ।
पुत्रस्‍नेहाकुला दीना विवत्सा गौरिवातुरा ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
पुत्र के खो जाने से बेचारी तुम्हारी माँ एक कुररी पक्षी की तरह विलाप कर रही है। वह अपने पुत्र के प्रेम में उसी तरह डूबी हुई है, जैसे कोई गाय अपने बछड़े से बिछड़ जाने के बाद रहती है।
 
Your mother, having lost her son, is crying for you like a Kurri bird. She is overwhelmed with love for her son like a cow separated from her calf.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)