वृष्णियों की नगरी अति सुंदर दिख रही थी। ऊँचे-ऊँचे मांगलिक खंभे और फूल-मालाओं, कपड़े की पताकाओं और कीमती रत्नों से सजे तोरण भी थे। प्रत्येक दरवाजे पर मंगल कलश, अगुरु धूप की सुगंध और दीपक सजे हुए थे।
वृष्णियों की नगरी अति सुंदर दिख रही थी। ऊँचे-ऊँचे मांगलिक खंभे और फूल-मालाओं, कपड़े की पताकाओं और कीमती रत्नों से सजे तोरण भी थे। प्रत्येक दरवाजे पर मंगल कलश, अगुरु धूप की सुगंध और दीपक सजे हुए थे।