Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.54.56: वृष्णियों की नगरी अति सुंदर दिख रही थी। ऊँचे-ऊँचे मांगलिक खंभे और फूल-मालाओं, कपड़े की पताकाओं और कीमती रत्नों से सजे तोरण भी थे। प्रत्येक दरवाजे पर मंगल कलश, अगुरु धूप की सुगंध और दीपक सजे हुए थे। | bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृष्णियों की नगरी अति सुंदर दिख रही थी। ऊँचे-ऊँचे मांगलिक खंभे और फूल-मालाओं, कपड़े की पताकाओं और कीमती रत्नों से सजे तोरण भी थे। प्रत्येक दरवाजे पर मंगल कलश, अगुरु धूप की सुगंध और दीपक सजे हुए थे।
The city of the Vrishnis looked very beautiful: there were tall auspicious poles and arches decorated with flower garlands, cloth flags and precious gems. At every door were filled auspicious pots, incense fragrant with aguru and lamps.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥