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bhagavat 10.54.55: सारे स्त्री-पुरुष आनंद से भरे हुए और चमकदार रत्नों तथा कुण्डलों से सुसज्जित हो विवाह के उपहार लेकर आये जिन्हें उन्होंने बहुत ही सुंदर वस्त्र पहने दूल्हा-दुलहिन को विनम्रतापूर्वक भेंट किया।   |   bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  10.54.55 
नरा नार्यश्च मुदिता: प्रमृष्टमणिकुण्डला: ।
पारिबर्हमुपाजह्रुर्वरयोश्चित्रवाससो: ॥ ५५ ॥
 
 
अनुवाद
सारे स्त्री-पुरुष आनंद से भरे हुए और चमकदार रत्नों तथा कुण्डलों से सुसज्जित हो विवाह के उपहार लेकर आये जिन्हें उन्होंने बहुत ही सुंदर वस्त्र पहने दूल्हा-दुलहिन को विनम्रतापूर्वक भेंट किया।
 
Filled with joy and adorned with glittering gems and earrings, all the men and women brought wedding gifts, which they respectfully presented to the bride and groom, who were dressed in exquisite attire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)