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bhagavat 10.54.53: इस प्रकार सभी विरोधी राजाओं को हराकर भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व ने भीष्मक की पुत्री को अपनी राजधानी में ले आए और वैदिक विधियों के अनुसार उससे विवाह कर लिया, हे कुरुओं के रक्षक।   |   bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  10.54.53 
भगवान् भीष्मकसुतामेवं निर्जित्य भूमिपान् ।
पुरमानीय विधिवदुपयेमे कुरूद्वह ॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी विरोधी राजाओं को हराकर भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व ने भीष्मक की पुत्री को अपनी राजधानी में ले आए और वैदिक विधियों के अनुसार उससे विवाह कर लिया, हे कुरुओं के रक्षक।
 
O protector of the Kurus, the Lord having thus defeated all the opposing kings brought the daughter of Bhiṣmaka to His capital where He married her in accordance with Vedic injunctions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)