Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.54.51: अपने शत्रुओं द्वारा निकाले जाने और शक्ति व शरीर में चमक खो देने के बाद, रुक्मी इस अपमान को भूल नहीं पाया कि उसे किस तरह से बेरहमी से नुकसान पहुँचाया गया था। हताशा में, उसने अपने रहने के लिए एक बड़े शहर का निर्माण कराया, जिसे उसने भोजकट कहा। | bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपने शत्रुओं द्वारा निकाले जाने और शक्ति व शरीर में चमक खो देने के बाद, रुक्मी इस अपमान को भूल नहीं पाया कि उसे किस तरह से बेरहमी से नुकसान पहुँचाया गया था। हताशा में, उसने अपने रहने के लिए एक बड़े शहर का निर्माण कराया, जिसे उसने भोजकट कहा।
Expelled by his enemies and devoid of strength and physical radiance, Rukmi, who had saved his life, could not forget how he had been disfigured. In despair, he built a large city for himself to live in, which he named Bhojkat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥