प्रहस्य भगवानाह मा स्म भैर्वामलोचने ।
विनङ्क्ष्यत्यधुनैवैतत्तावकै: शात्रवं बलम् ॥ ५ ॥
अनुवाद
भगवान ने हँसते हुए उसे आश्वस्त किया, “हे सुन्दर नेत्रों वाली, तुम डरो मत! ये शत्रु सेना तुम्हारे सैनिकों द्वारा अभी नष्ट होने वाली है।”
The Lord smiled and assured her, “Oh beautiful-eyed one, don’t be afraid! This enemy army is bound to be destroyed by your soldiers.”
तात्पर्य
रुक्मिणी के प्रति अपने गहरे स्नेह को व्यक्त करने के लिए, भगवान कृष्ण ने अपनी यादव सेना को बहादुरी से "तुम्हारे आदमी" कहकर संबोधित किया. इससे संकेत मिलता है कि अब भगवान का पूरा वंश उनकी प्यारी रानी की संपत्ति बन चुका था. सर्वोच्च भगवान कृष्ण अपने आनंदमय वैभवों को सभी जीवों के साथ साझा करना चाहते हैं और इसलिए वह उन्हें ईमानदारी से वापस घर, भगवद् धाम लौटने के लिए आमंत्रित करते हैं. श्रील प्रभुपाद द्वारा अपने आध्यात्मिक गुरु श्रीला भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर के आदेश पर पूरी दुनिया में शुरू किया गया कृष्णभावनामृत आन्दोलन, जिन्होंने स्वयं अपने आदरणीय पिता श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के आदेश पर पूरे भारत में उपदेश दिया, भगवान कृष्ण के प्रेममय संदेश का प्रसार कर रहा है: उन्हें याद रखो, उनकी सेवा करो, उनके पास लौटो और ईश्वर के राज्य की असीम उदारता में भागीदार बनो.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥