शुकदेव गोस्वामी ने कहा: रुक्मिणी अत्यंत भय से काँपने लगी और उसका मुँह सूखने लगा। उसके गले में रुंधाव आ गया। इस बेचैनी में उसका सोने का हार टूटकर बिखर गया। उसने कृष्ण के पैर पकड़ लिए और कृष्ण ने दया करके उसे छोड़ दिया।
Sukadeva Goswami said: Rukmini was so frightened that her body parts started trembling, her mouth became dry and her throat became choked due to fear. Her gold necklace got scattered due to agitation. She caught hold of Krishna's feet. Then the Lord showed mercy and let her go.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती "लौकिक नियम" का हवाला देते हैं कि किसी की बहन दया की मूर्ति है: दयाया भागिनी मूर्ति। यद्यपि रुक्मी दुष्ट था और अपनी बहन के सर्वोत्तम हितों का विरोधी था, पर रुकमणि उसके प्रति करूण थी, और प्रभु भी उसकी करुणा में भागीदार बने।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥