Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.54.33: श्री रुक्मिणी ने कहा: हे योगेश्वर, हे अप्रमेय, हे देवताओं के देव, हे ब्रह्माण्ड के स्वामी! हे मंगलमय और बाहुबली! कृपया मेरे भाई का वध न करें।   |   bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.54.33 
श्रीरुक्‍मिण्युवाच
योगेश्वराप्रमेयात्मन् देवदेव जगत्पते ।
हन्तुं नार्हसि कल्याण भ्रातरं मे महाभुज ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
श्री रुक्मिणी ने कहा: हे योगेश्वर, हे अप्रमेय, हे देवताओं के देव, हे ब्रह्माण्ड के स्वामी! हे मंगलमय और बाहुबली! कृपया मेरे भाई का वध न करें।
 
Sri Rukmini said: O Yogeshwara, O unfathomable, O God of gods, O Lord of the universe! O auspicious and valiant! Please do not kill my brother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)