यत्र यासि स्वसारं मे मुषित्वा ध्वाङ्क्षवद्धवि: ।
हरिष्येऽद्य मदं मन्द मायिन: कूटयोधिन: ॥ २५ ॥
अनुवाद
“जहाँ-जहाँ तू मेरी बहन को यज्ञ के घी को चुराने वाले कौवे की तरह ले जाएगा वहीं-वहीं मैं तेरा पीछा करूँगा। अरे मूर्ख, धोखेबाज, अरे युद्ध में ठगने वाले! मैं आज ही तेरे झूठे गर्व को चूर-चूर कर दूँगा।”
“I will follow you wherever you take my sister like a crow stealing the sacrificial ghee. Oh fool, cheater, cheater in war! I will shatter your false pride today itself.”
तात्पर्य
अपने उन्मादपूर्ण हमले में, रुक्मी ने वैसी ही विशेषताएँ दिखाईं, जो उसने श्री कृष्ण को दीं। प्रत्येक जीवित प्राणी भगवान का हिस्सा है और भगवान का है। इसलिए रुक्मी एक कौवे की तरह था जो भगवान के आनंद के लिए किए गए यज्ञ के प्रसाद को चुराने की कोशिश कर रहा था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥