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bhagavat 10.54.21: यह कह कर वह अपने रथ पर चढ़ा और अपने सारथि से कहा, "घोड़ों को तेज़ी से वहीं ले चलो जहाँ कृष्ण हैं। मुझे उससे युद्ध करना है।"   |   bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.54.21 
इत्युक्त्वा रथमारुह्य सारथिं प्राह सत्वर: ।
चोदयाश्वान् यत: कृष्ण: तस्य मे संयुगं भवेत् ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
यह कह कर वह अपने रथ पर चढ़ा और अपने सारथि से कहा, "घोड़ों को तेज़ी से वहीं ले चलो जहाँ कृष्ण हैं। मुझे उससे युद्ध करना है।"
 
Saying this, he got on his chariot and told his charioteer, “Drive the horses quickly and take them to where Krishna is. I have to fight with him.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)