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bhagavat 10.54.18: किन्तु शक्तिशाली रुक्मी को कृष्ण से विशेष रूप से द्वेष था। वह इस तथ्य को बरदाश्त नहीं कर सका कि कृष्ण उनकी बहन को बलपूर्वक ले गए और रक्षास विधि से विवाह कर लिया। इसलिए उसने भगवान का पीछा करने के लिए सेना के एक पूरे दस्ते को ले लिया।   |   bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.54.18 
रुक्‍मी तु राक्षसोद्वाहं कृष्णद्विडसहन् स्वसु: ।
पृष्ठतोऽन्वगमत् कृष्णमक्षौहिण्या वृतो बली ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
किन्तु शक्तिशाली रुक्मी को कृष्ण से विशेष रूप से द्वेष था। वह इस तथ्य को बरदाश्त नहीं कर सका कि कृष्ण उनकी बहन को बलपूर्वक ले गए और रक्षास विधि से विवाह कर लिया। इसलिए उसने भगवान का पीछा करने के लिए सेना के एक पूरे दस्ते को ले लिया।
 
But the powerful Rukmi had a special hatred for Krishna. He could not tolerate the fact that Krishna should forcibly take away his sister and marry her according to the demoniac method. So he took a whole contingent of the army and pursued the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)