Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.54.17: शुकदेव गोस्वामी ने कहा : इस तरह अपने मित्रों के समझाने-बुझाने पर शिशुपाल अपने साथियों सहित अपनी राजधानी लौट गया। जो योद्धा बच गए थे, वे भी अपने-अपने नगरों को लौट गए। | bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
एवं प्रबोधितो मित्रैश्चैद्योऽगात् सानुग: पुरम् ।
हतशेषा: पुनस्तेऽपि ययु: स्वं स्वं पुरं नृपा: ॥ १७ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा : इस तरह अपने मित्रों के समझाने-बुझाने पर शिशुपाल अपने साथियों सहित अपनी राजधानी लौट गया। जो योद्धा बच गए थे, वे भी अपने-अपने नगरों को लौट गए।
Shukdev Goswami said: Thus, after being persuaded by his friends, Shishupal returned to his capital along with his followers. The warriors who were left also returned to their cities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥