ठीक उसी तरह, जैसे एक कठपुतली का रूप धारण करने वाली स्त्री अपने कठपुतली चलाने वाले की इच्छा के मुताबिक नाचती है, इसी प्रकार यह दुनिया, जो सर्वोच्च भगवान द्वारा नियंत्रित है, सुख और दुख दोनों में संघर्ष करती रहती है।
Just as a puppet dressed as a woman dances according to the wishes of its master, similarly this world controlled by God keeps grappling with both happiness and sorrow.
तात्पर्य
परमेश्वर की इच्छा से ही जीवों को अपने कर्मों का फल मिलता है। जो परमतत्व को जानता है, वह परमतत्व श्री भगवान के सामने समर्पित हो जाता है और फिर उसे भौतिक जगत में नहीं गिना जाता। क्योंकि भौतिक जगत में जो भी प्रयत्न करता है, वह भगवान की सृष्टि का शोषण ही करता है, अतः उस सृष्टि के नियमों के अनुसार ही उसे भोग्य तथा अपभोग्य कर्मों का फल मिलता रहता है। यह शरीर धारण करके प्राप्त किया हुआ भौतिक जगत् पूर्ण आनंद की दृष्टि से देखा जाए तो यह विफलता ही है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥