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bhagavat 10.53.50: तब राजकुमारी ने अपनी चुप्पी का व्रत तोड़ा और रत्नजटित अँगूठी से सजे अपने हाथ से एक दासी के हाथ को पकड़ कर अम्बिका मन्दिर से बाहर आ गई।   |   bhagavat अध्याय 10.53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  10.53.50 
मुनिव्रतमथ त्यक्त्वा निश्चक्रामाम्बिकागृहात् ।
प्रगृह्य पाणिना भृत्यां रत्नमुद्रोपशोभिना ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
तब राजकुमारी ने अपनी चुप्पी का व्रत तोड़ा और रत्नजटित अँगूठी से सजे अपने हाथ से एक दासी के हाथ को पकड़ कर अम्बिका मन्दिर से बाहर आ गई।
 
Then the princess broke her vow of silence and came out of the Ambika temple holding a maid with her hand adorned with a jeweled ring.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)