vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् भागवतम
»
स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ
»
अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण
»
श्लोक 33
श्लोक
10.53.33
मधुपर्कमुपानीय वासांसि विरजांसि स: ।
उपायनान्यभीष्टानि विधिवत् समपूजयत् ॥ ३३ ॥
अनुवाद
उन्हें मधुपर्क, नए वस्त्र और अन्य काम्य पदार्थ भेंट कर वह विधिवत उनकी पूजा की।
Offering them madhu-park, new clothes and other desired gifts, he worshipped them according to the prescribed rites.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×