श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.53.32 
प्राप्तौ श्रुत्वा स्वदुहितुरुद्वाहप्रेक्षणोत्सुकौ ।
अभ्ययात्तूर्यघोषेण रामकृष्णौ समर्हणै: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
जब राजा ने सुना कि कृष्ण और बलराम आये हैं और वह उसकी पुत्री का विवाह देखने के लिए उत्सुक हैं, तो वह बैंड-बाजे के साथ उनका स्वागत करने के लिए बहुत सारी भेंटें लेकर आगे बढ़ा।
 
When the king heard that Krishna and Balarama had come and were anxious to see his daughter married, he proceeded to welcome them with great pomp and show and with abundant presents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)