अथ कृष्णविनिर्दिष्ट: स एव द्विजसत्तम: ।
अन्त:पुरचरीं देवीं राजपुत्रीं ददर्श ह ॥ २८ ॥
अनुवाद
तत्पश्चात, कृष्ण के आदेशानुसार शुद्धतम ब्राह्मण ज्ञानी, राजमहल के हरमगृह में दिव्य राजकुमारी रुक्मिणी से मिलने पहुँच गया।
Then that purest, learned Brahmin, as per Krishna's orders, came to the inner chamber of the palace to meet the divine princess Rukmini.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, श्री कृष्ण शहर के बाहर वाले बगीचों में पहुंच गए थे और रुक्मिणी के लिए चिंता में उन्होंने उस ब्राह्मण को उन्हें अपने आगमन की खबर देने का निर्देश दिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥