श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 52: भगवान् कृष्ण के लिए रुक्मिणी-संदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.52.5 
भगवान् पुनराव्रज्य पुरीं यवनवेष्टिताम् ।
हत्वा म्‍लेच्छबलं निन्ये तदीयं द्वारकां धनम् ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान मथुरा नगरी में लौटे, जो अभी भी यवनों से घिरी हुई थी। इसके बाद उन्होंने बर्बर यवनों की सेना को नष्ट किया और उनकी बहुमूल्य वस्तुओं को द्वारका ले गए।
 
The Lord returned to the city of Mathura, which was still surrounded by the Yavanas. He then destroyed the army of the barbaric Yavanas and took the valuables of those Yavanas to Dwaraka.
तात्पर्य
इस श्लोक से स्पष्ट है कि कलयवन ने ही भगवान कृष्ण को पर्वतीय गुफा में जाने के लिए प्रेरित किया। जब कृष्ण मथुरा नगर लौट आए, तो उन्होंने विस्तृत बर्बर सेना को नष्ट किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)