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bhagavat 10.52.39: इसलिए हे प्रभु, मैंने तुम्हें अपने पति के रूप में चुना है और मैं तुम्हारी शरण में आई हूँ। हे सर्वशक्तिमान, शीघ्र आओ और मुझे अपनी पत्नी बनाओ। हे मेरे कमल-नयन प्रभु, शिशुपाल को किसी सिंह की संपत्ति को चुराने वाले सियार की तरह किसी वीर के अंश को कभी छूने मत दो।   |   bhagavat अध्याय 10.52: भगवान् कृष्ण के लिए रुक्मिणी-संदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 52: भगवान् कृष्ण के लिए रुक्मिणी-संदेश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.52.39 
तन्मे भवान् खलु वृत: पतिरङ्ग जाया-
मात्मार्पितश्च भवतोऽत्र विभो विधेहि ।
मा वीरभागमभिमर्शतु चैद्य आराद्
गोमायुवन्मृगपतेर्बलिमम्बुजाक्ष ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे प्रभु, मैंने तुम्हें अपने पति के रूप में चुना है और मैं तुम्हारी शरण में आई हूँ। हे सर्वशक्तिमान, शीघ्र आओ और मुझे अपनी पत्नी बनाओ। हे मेरे कमल-नयन प्रभु, शिशुपाल को किसी सिंह की संपत्ति को चुराने वाले सियार की तरह किसी वीर के अंश को कभी छूने मत दो।
 
Therefore, O Lord, I have chosen You as my husband and I have taken refuge in You. O Almighty One, please come immediately and make me Your wife. O my lotus-eyed Lord, never let a jackal like Sisupala, who steals the wealth of a lion, touch the essence of a hero.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)