श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 52: भगवान् कृष्ण के लिए रुक्मिणी-संदेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.52.25 
बन्धूनामिच्छतां दातुं कृष्णाय भगिनीं नृप ।
ततो निवार्य कृष्णद्विड् रुक्‍मी चैद्यममन्यत ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, चूँकि रुक्मी ने भगवान पर ईर्ष्या की थी, इसलिए उसने अपने परिवार के सदस्यों को अपनी बहन कृष्ण को देने से रोक दिया, हालांकि वे चाहते थे। इसके बजाय, रुक्मी ने रुक्मिणी को शिशुपाल को देने का फैसला किया।
 
O King, because Rukmi hated the Lord, he prevented his family from giving his sister to Krishna, against their wishes. Instead, Rukmi decided to give Rukmini to Sisupala.
तात्पर्य
रुक्मी ने अपने बड़े भाई होने की स्थिति का दुरुपयोग किया और अशुद्ध इरादों से काम किया। उसे अपने फैसले पर पछताना पड़ेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)