हे कुरुवंशी वीर, स्वयं परमेश्वर, गोविंद ने भीष्मक की पुत्री वैदर्भी (रुक्मिणी) से विवाह किया जो लक्ष्मी जी का अंश थी। भगवान ने रुक्मणी की इच्छा से ही ऐसा किया और उनके इस कार्य में शाल्व तथा शिशुपाल के पक्ष में रहने वाले अन्य राजा बाधक बने तो भगवान ने उन्हें परास्त कर दिया। दरअसल सबके देखते-देखते श्री कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण वैसे ही किया जैसे निर्भय गरुड़ ने देवताओं से अमृत का हरण किया था।
O warrior of Kuru, Lord Govinda married Bhishmaka's daughter Vaidarbhi (Rukmini) who was a manifestation of Goddess Lakshmi herself. The Lord did so at her own will and for this purpose He defeated Shalva and other kings who were in favor of Sisupala. In fact, in front of everyone, Sri Krishna carried away Rukmini in the same manner as the fearless Garuda had carried away the nectar of death from the gods.
तात्पर्य
श्रील जीव गोस्वामी ने इन दो श्लोकों पर निम्नलिखित गहन टिप्पणियाँ प्रस्तुत की हैं: श्रीयो मात्रम शब्द इंगित करते हैं कि सुंदर रुक्मिणी भाग्य की शाश्वत देवी का प्रत्यक्ष विस्तार है। इसलिए वह भगवान की दुल्हन बनने के योग्य हैं। जैसा कि ब्रह्म-संहिता (5.56) में कहा गया है, श्रीयाः कांता कांतः परम-पुरुषः: "आध्यात्मिक दुनिया में, सभी स्त्री प्रेमी भाग्य की देवी हैं और पुरुष प्रेमी सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं।" इस प्रकार, श्रील जीव गोस्वामी बताते हैं, श्रीमती रुक्मिणी-देवी श्रीमती राधारानी का एक पूर्ण भाग है। पद्म पुराण के कार्तिक-माहात्म्य में कहा गया है, कैशोरे गोप-कन्यास ता युवने राज-कन्यकाः: "बचपन में, श्री कृष्ण ने चरवाहों की बेटियों के साथ आनंद लिया, और उनकी किशोरावस्था में उन्होंने राजाओं की बेटियों के साथ आनंद लिया।" इसी तरह, स्कंद पुराण में हमें यह कथन मिलता है: रुक्मिणी द्वारवत्यां तु राधा वृंदावने वने। "वृंदावन के जंगल में रुक्मिणी द्वारका में राधा है।" यहाँ स्वयंवर शब्द का अर्थ है "खुद की पसंद से"। यद्यपि यह शब्द अक्सर एक औपचारिक वैदिक समारोह को संदर्भित करता है जिसमें एक अभिजात लड़की अपने पति का चयन कर सकती है, यहाँ यह रुक्मिणी के साथ कृष्ण के विवाह के आसपास की अनौपचारिक और वास्तव में अभूतपूर्व घटनाओं को इंगित करता है। वास्तव में, श्री कृष्ण और श्रीमती रुक्मिणी ने अपने शाश्वत, पारलौकिक प्रेम के कारण एक-दूसरे को चुना।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥