श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 51: मुचुकुन्द का उद्धार  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  10.51.62 
क्षात्रधर्मस्थितो जन्तून् न्यवधीर्मृगयादिभि: ।
समाहितस्तत्तपसा जह्यघं मदुपाश्रित: ॥ ६२ ॥
 
 
अनुवाद
चूँकि तुमने एक क्षत्रिय के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन किया है, जिसमें शिकार करना और अन्य आवश्यक कार्य भी शामिल हैं, जिसके चलते तुम्हें जीवों की हत्या करनी पड़ी, इसलिए अब तुम्हें मेरे प्रति पूर्ण समर्पण के साथ सावधानीपूर्वक तपस्या करनी चाहिए और इस प्रकार अपने द्वारा किए गए पापों से मुक्ति प्राप्त करनी चाहिए।
 
Since you have followed the principles of a Kshatriya, you have killed animals while hunting and performing other activities. You should wipe off the sins thus committed by carefully performing austerities and surrendering to Me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)